गोरखपुर। गीता वाटिका में राधाबाबा की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को वृंदावन से आए भक्तमाली रामकृष्ण ने कुंती स्तुति, भीष्म स्तुति और परीक्षित जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान की शरणागति ही जीवन का सच्चा संबल है। मनुष्य को हर परिस्थिति में प्रभु का स्मरण करना चाहिए।कथा वाचक ने बताया कि अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्षित की.