केले का पौधा सिर्फ फल ही नहीं देता, बल्कि किसानों, स्थानीय सप्लायर्स और रेस्टोरेंट से जुड़े लोगों की आजीविका का आधार भी है। केरल में केले के पत्ते रोज़गार और पारंपरिक सद्या भोजन का अहम हिस्सा हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। CSIR-NIIST के वैज्ञानिक केले के तने से फाइबर और प्लांट-बेस्ड लेदर जैसे उपयोगी उत्पाद विकसित करने पर काम कर रहे हैं। यह कहानी दिखाती है कि पारंपरिक खेती, स्थानीय.