लखनऊ। सुगम संगीत में सुर और ताल के साथ गीत के शब्दों का भाव और गायकी का अंदाज भी महत्वपूर्ण होता है। रागदारी और भावों की सटीक अभिव्यक्ति ही गायन को प्रभावशाली बनाती है। शनिवार को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में पुणे की प्रख्यात संगीत कलाकार विदुषी संगीता नेरुरकर ने विद्यार्थियों को गायन की इन्हीं बारीकियों से रूबरू कराया। उन्होंने प्रस्तुतियों के जरिये सुगम संगीत की विभिन्न विधाओं और शैलियों.