बॉम्बे हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा की सितंबर 2011 में हुई गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया है। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को उन्हें दो लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। फरेरा 2018 के भीमा कोरेगांव मामले में भी आरोपित हैं और वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं। जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के और जस्टिस राज वाकोडे की नागपुर पीठ ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया।