भारतीय लोकतंत्र की मजबूती उसके नेताओं की गरिमा और संवाद की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। लेकिन हाल के वर्षों में, राजनीतिक भाषणों व बयानों में अभद्र टिप्पणियां व असंसदीय भाषा, गाली-गलौज का बढ़ता. जंतर-मंतर पर जेन-जी आंदोलन के दौरान भाषा के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त की गई है।