लखनऊ में जिस परिवार में वर्षों बाद मांगलिक कार्यक्रम होना था, वहां मातम पसरा था। सुयश की शादी के कार्ड छपने गए थे। मेहमानों की सूची तैयार की जा रही थी, लेकिन किसी को पता नहीं था कि पांच दिसंबर को शादी से पहले घर पर तीन-तीन लोगों की तेरहवीं की तैयारी करनी पड़ेगी। ब्राह्मणी टोला में मंगलवार को हर तरफ इसी की चर्चा थी। एक साथ तीन अर्थियां उठीं तो शिवाजी.